रुपया में ऐतिहासिक गिरावट : डॉलर के सामने रुपया हुआ धराशाई, सबसे निचले स्तर 94.05 पर जा पहुंचा

आज 21 मार्च को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अब तक के सबसे निचले स्तर 94.05 पर जा पहुँचा है। रुपया के कमजोर होने के पीछे कई कारण निकलकर सामने आ रहे हैं, जिसमें से गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच में चल रहे तनाव, विदेशी निवेशकों का भारतीय शेयर बाजार से लगातार पैसे निकालने और वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने भारतीय मुद्रा की पूरी तरह से कमर तोड़कर रख दिया है।

गिरावट की सबसे बड़ी वजह

भारतीय मुद्रा में लगातार गिरावट की सबसे बड़ी वजह कुछ इस प्रकार हैं :

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अंतर्राष्ट्रीय तनाव

इन दिनों पश्चिमी एशिया में चल रहे तनाव के चलते वैश्विक स्तर पर बाजारों में अनिश्चितता बनी हुई है। जब भी दुनिया में युद्ध की स्थिति पैदा होती है तो निवेशक जोखिम मुद्राओं मुद्राओं से अपने पैसे निकालकर सुरक्षित जगह जैसे सोना, चांदी और डॉलर में निवेश करते हैं जिससे डॉलर की वैल्यू बढ़ने पर रुपए की वैल्यू कम हो जाती है।

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कच्चे तेल की कीमतों में उछाल

पूरे विश्व में कच्चे तेल खपत करने के मामले में अमेरिका और चीन के बाद भारत तीसरा सबसे बड़ा देश है। भारत कच्चे तेल के लिए लगभग 85% तेल बाहर से इंपोर्ट करता है जिसमें सबसे ज्यादा रूस (35%), इराक (20%), सऊदी अरब (15-16%) और कुछ मात्रा में अमेरिका, कुवैत से भी कच्चा तेल इंपोर्ट करता है। अभी पश्चिम एशिया में तनाव के चलते और Strait of Hormuz के बंद होने के कारण क्रूड ऑयल की कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल के पास पहुंच गया है। यही कारण है कि रुपया कमजोर हो गया है।

फेडरल रिजर्व के फैसले का वैश्विक असर

अमेरिका के Federal Reserve ने अभी हाल ही में 17-18 मार्च को महंगाई को काबू करने के लिए ब्याज दरों को 3.50% से 3.75% बनाए रखा है। अमेरिका में ब्याज दर उच्च होने पर वहां के निवेशकों को अच्छा रिटर्न मिलता है जिससे फौरन इन्वेस्टर यहां से पैसा निकाल कर वहां निवेश कर रहे हैं जिससे रुपए कीमत में लगातार गिरावट हो रही है।

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आयात-निर्यात में बढ़ता असंतुलन

भारत जितना सामान बाहर एक्सपोर्ट करता है उससे कहीं ज्यादा बाहर से सामान इंपोर्ट करता है और यह सारा लेनदेन डॉलर में होता है इसके करण भी भारतीय मुद्रा कमजोर हो रहे है।

मजबूत डॉलर से वैश्विक बाजार में दबदबा

पिछले कुछ महीनों में डॉलर इंडेक्स काफी ऊपर गया है जब वैश्विक स्तर पर डॉलर की कीमत बढ़ती है तो भारत, ब्राजील,अफ्रीका की मुद्राओं में गिरावट स्वाभाविक रूप से होता है।

भारतीय मुद्रा कमजोर होने पर आम आदमी पर इसका क्या असर होगा?

महंगाई की मार

भारत अपनी जरूरत का 80 से 85% कच्चा तेल बाहर से आयात करता है डॉलर की कीमत बढ़ने पर बाहर से सामान मंगाने पर उन कंपनियों को भारत की ओर से मोटी रकम चुकानी पड़ती है। जिससे पेट्रोल डीजल की कीमत बढ़ोतरी हो सकती है, पेट्रोल डीजल की कीमत में बढ़ोतरी होने से खाद्य पदार्थों की क़ीमत में भी बढ़ोतरी होगी जो आम आदमी के खर्चे बढ़ाने वाली है।

इलेक्ट्रॉनिक सामान महंगे होंगे

भारत अधिकतर इलेक्ट्रॉनिक सामान जैसे मोबाइल, लैपटॉप, घरेलू उपकरण बाहर से मंगाता है जिसकी कीमत बढ़ने पर आम आदमी की जेब पर असर पड़ने वाला है।

विदेश में पढ़ने और घूमने महंगे होंगे

डॉलर की कीमत में लगातार उछाल होने की वजह से भारतीयों को अमेरिका में पढ़ना, विदेश में ट्रेवल करना महंगा हो जाएगा। वहाँ के होटल, रूम रेंट, खाना सब महंगा होगा जो भारतीयों की जेब खाली करने वाला है।

ऑटोमोबाइल सेक्टर पर असर

भारत अधिकतर गाड़ियाँ खुद ही बनाता है लेकिन इसका अधिकतर पार्ट्स बाहर से मांगता है जो की डॉलर की वैल्यू बढ़ने से उसकी कास्ट बढ़ जाएगी जिससे गाड़ियों की कीमत पर उछाल देखने को मिलेगा।

किन चीजों पर होगा फायदा?

रुपए कमजोर होने पर पेट्रोल, डीजल, इलेक्ट्रॉनिक,गाड़ियां और रोजमर्रा की चीजें महंगी तो होंगी लेकिन डॉलर बढ़ने से आईटी सेक्टर और फार्मा कंपनी जो भारत से बाहर सामान बेचती हैं उनको इसका फायदा मिलने वाला है। साथ ही विदेश में जॉब करने वाले भारतीयों को इसका फायदा मिलने वाला है साथ ही यूट्यूबर्स को भी इसका फायदा मिलेगा।

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By PARAS

Paras Nath is a content creator at Buzzera.in, where he writes on news, entertainment, cricket, automobiles, and stock market updates. He strives to deliver content that is both engaging and informative for his readers.

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